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मुंह में डायरिया!

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नेता, नेता होता है। कुछ भी कर सकता है। कुछ भी बोलने का विशेषाधिकार रखता है। देखिये! भाजपा सांसद सैयद शाहनवाज हुसैन ने डायरिया का नया स्थान बताया है। उनके अनुसार यह मुंह में भी होता है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह को मुंह में डायरिया हो गया है। डाक्टर चकरा सकते हैं। इलाज करने में परेशान हो सकते हैं। अभी तक तो डायरिया …! इस बारे में शाहनवाज जी की सलाह फायदेमंद हो सकती है। वे नये इलाज, नई दवा का पेटेंट करा सकते हैं। आजकल भाजपाई बीमारी और उसके इलाज पर बहुत जोर दे रहे हैं। रविवार को पार्टी कार्यालय के स्वास्थ्य जांच शिविर में एचआईवी जांच के काउंटर पर पांच फीसदी भाजपाई ही डरते, सहमते आये। स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे इन्हें एड्स के प्रति जागरूकता खातिर प्रेरक बनाना चाहते थे। पनचानबे प्रतिशत शायद इसी समझ के चलते बिदक गये कि अगर टेस्ट पाजीटिव निकला, तो करियर निगेटिव हो जायेगा? साफ है कि नेता, सिर्फ बोलने के लिए बोलता है। बस पब्लिक को समझाता है। वह बोलता कुछ है, करता कुछ और है। जो बोलता है, वह करता नहीं है। इसी हफ्ते रामवचन राय ने राजद से जदयू में जाने के दौरान अपनी सर्विस ब्रेक नहीं की। राय साब ने सुबह में राजद का प्रस्ताव तैयार किया, उसकी बैठक में भी शामिल हुए और शाम होने से पहले जदयू में टहल गये। बाप रे बापऽऽ! एक खबर आयी-मंत्री जी ने चैम्बर में खिचड़ी खायी। उनका नाम परवीन अमानुल्लाह है। यह तय करना मुश्किल है कि यह खिचड़ी का सौभाग्य था या चैम्बर का …! खिचड़ी सबसे सस्ता और शुद्ध शाकाहारी व्यंजन है। मगर यहां के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में नानवेज खिचड़ी का प्रचलन है। असल में खिचड़ी से अक्सर छिपकली, तिलचट्टा या तरह-तरह के कीड़े मिलते रहते हैं। मंत्री जी ने खिचड़ी भोज में खिचड़ी लूट के तरीकों व उसकी मात्रा को जाना है। बढिय़ा तरीका है। अब मुझे भी लग गया है कि हम वाकई कलियुग के आखिरी चरण (भटयुग) में हैं। भोजपुर के एक थाना के स्टोर में भगवान रामानुज और हनुमान जी पड़े हुए हैं। उनको जमानतदार नहीं मिल रहे हैं। इधर, बिहार के कांवरियों ने बाबा बैद्यनाथ को नया टास्क दे दिया है-बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांवरियों से इस मनौती की अपील की है। बाबा परेशान हो सकते हैं। पता नहीं वे एनडीसी को कैसे समझायेंगे, पटायेंगे? मैं अभी तक यही जानता था कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है। लेकिन सरकार के मुताबिक पचपन साल से अधिक उम्र के अफसर लैपटाप नहीं चला सकते हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के उन्हीं अधिकारियों को लैपटाप मिलना है, जिनकी उम्र 55 वर्ष तक है। उस दिन पटना जंक्शन के मुहाने पर रखे रेल इंजन से अचानक धुंआ निकलने लगा। धुंआ देखकर पुलिस वाले भी भागने लगे। पुलिस को भागता देख पब्लिक अफरातफरी के मोड में आ गई। खैर, अंत में पता चला कि इंजन में कोयला का चूल्हा जल रहा है। कुछ लोगों ने सबके सामने इस अनमोल विरासत को अपना बसेरा बना लिया है। दो घूसखोर इंजीनियरों को गिरफ्तार कराने वाला लापता है। पटना हाईकोर्ट ने इस मामले में विजिलेंस के डीआइजी एवं गया रेंज के डीआइजी से पूछा है कि आखिर बड़े-बड़े रिश्वतखोर कुछ ही दिन में कैसे छूट जाते हैं? लापता व्यक्ति का नाम शिव कुमार सिंह है। वे विद्या देवी के पति हैं। पूर्णिया में थोक भाव में झोला छाप डाक्टर पकड़े गये हैं। पता चला कि आयुर्वेदिक चिकित्सक भी अपने साइनबोर्ड में एमडी लिखता है। मेरे एक मित्र ने इसे बारे में बड़ी लंबी दास्तान सुनायी है। आप भी सुनिये-कुष्ठ आश्रम में दवा बांटने वाला आजकल अपने इलाके का धाकड़ प्रैक्टिसनर है। उसे पानी चढ़ाने में ज्यादा फायदा लगा। वह पानी चढ़ाने लगा। एक डाक्क साब ने एक आदमी के गुप्तांग के आपरेशन के दौरान एक अंग निकालकर उसमें हल्दी भरकर स्टिच कर दिया। उस पर जुर्माना हुआ। किंतु वह आज तक पूरी तरह मुक्त है। नया ज्ञान-वाकई हम आजाद हैं। मुकम्मल आजाद। हर कोई कुछ भी करने को स्वतंत्र है। गब्बर सिंह के रिश्तेदार के घर से चोरी गये गहने गोबर की ढेर से मिले हैं। एक दरोगा बर्खास्त हो चुका है। और अंत में … अभी-अभी एक शोध आया है। अल्कोहल, कीटनाशक दवाओं से बहुत कम हानिकारक माना गया है। अब चावल या रोटी खाकर कोई झूमने लगे, तो …! आलू- परवल की सब्जी का भी अपना नशा होगा। यह भोजन में काकटेल के मजे की गुंजाइश है। मिक्स वेजीटेबुल का अपना मजा होगा।

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

J L SINGH के द्वारा
July 20, 2011

काफी मिहनत और शोध आपने इस व्यंग्य कथा में किया है. आज ही मैने बाबाधाम के पंडा के मुख से सुना- बाबा धाम कब बैष्णो देवी, बालाजी, पुत्तुपर्सी, या पद्मनाभ के तुल्य में आयेगा. यह भी विशेष धाम की श्रेणी में स्थान चाहते हैं. हमारे भोले बाबा केवल बेलपत्र और गंगाजल में खुश हो जाते है. वे अपना चढ़ावा इस महंगाई के जमाने में भी सवा रूपया रखे हुए हैं जबकि अब चवन्नी दुर्लभ हो गयी है, हमारे भक्तजनों को इतना तो ख्याल रखना चाहिए कि सवा रुपये की जगह सवा सौ रुपये चढ़ाएं. मान नीय सांसद महोदय भी यही रोना रो रहे थे यहाँ से कोई प्रणव मुखर्जी क्यों नहीं बनता? निशिकांत झा आखिर जगन्नाथ मिश्र भी तो नहीं बन पाए.

subhash के द्वारा
July 19, 2011

baki ka mujhe pata nahi lekin digvijay ko asal me hi kuchh hua hai dayriya ya usase se bhi ghatak

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
July 19, 2011

हा हा हा मधुरेश जी, बहुत सुंदर

satya sheel agrawal के द्वारा
July 19, 2011

मधुरेश जी. अपने अच्छा विश्लेषण किया आज की राजनैतिक स्तिथि का

Jack के द्वारा
July 19, 2011

बहुत ही बढ़िया व्यंग्य किया है आपने. काफी दिनों बाद आपका लेख पढ़कर अच्छा लगा.


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