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हॉर्स ट्रेडिंग

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नेताओं ने अपने और राजनीति के बारे में नया ज्ञान कराया है। यह बिल्कुल लेटेस्ट है। आपसे शेयर करता हूं।

नेताओं ने बताया है कि नेता के घर में आग शॉर्ट सर्किट से ही लगती है। यानी, अपने घर की आग के लिए नेता खुद जिम्मेदार होता है। उसकी लापरवाही होती है। मैं समझता हूं, चूंकि नेता देशहित व जनहित के काम में इतना व्यस्त रहता है कि उसे अपने घर की वायरिंग वगैरह चेक करने-कराने की फुर्सत नहीं होती है। आग लगनी ही है। फिर नेता को अपने से ज्यादा दूसरों के घर की चिंता होती है। नेता को अपने घर में आग लगने की जानकारी तब होती है, जब धुएं के गुबार के साथ बाकायदा लपटें दिखने लगती हैं। अपने नेताओं ने यह भी बताया है कि शार्ट सर्किट से आग लगने की पूरी जानकारी रहने के बावजूद नेता, अपने घर की आग के लिए हमेशा दूसरे को जिम्मेदार बताता है।

मैं, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को सुन रहा था। आप भी सुनिए-नीतीश कुमार दमकल की तलाश में हैं। उनके घर में आग लगी है। उन्हीं के लोगों ने शॉर्ट सर्किट कराया है।

लालू जी को सुनते हुए मुझे कुछ पुरानी बातें याद आ रही हैं। अभी जब राजद में विद्रोह हुआ था, तब नीतीश कुमार ने कहा था कि लालू जी के घर में आग शार्ट सर्किट से लगी है। उनके घर की वायरिंग ठीक नहीं है। आग, बार-बार लगती रहेगी। विधानसभा अध्यक्ष ने राजद के तेरह विधायकों को सदन में अलग ग्रुप के रूप में मान्यता दे दी। राजद बुरी तरह भड़क गया था। इन सबके लिए जदयू को जिम्मेदार बताया था। नीतीश ने लालू को जवाबदेह ठहराया था।

अब जदयू और भाजपा के बीच यही हो रहा है। जदयू ने अपने घर की आग (विधायकों की बगावत) के लिए भाजपा को जिम्मेदार बता रहा है और जवाब में भाजपा, शार्ट सर्किट की बात दोहरा रही है। कह रही है कि अपने घर की आग के लिए नीतीश कुमार स्वयं जिम्मेदार हैं। फिजूल में भाजपा को बदनाम कर रहे हैं। चलिए, नेता के घर की आग, इसकी वजह और इससे जुड़े तमाम तरह के ज्ञान पुष्ट अंदाज में सामने आ चुके हैं। ज्ञानवान हो रहे हैं न? मैं तो हो चुका हूं।

मगर मुझे एक बात पर थोड़ा कन्फ्यूजन है। यह दरअसल, कुछ सवाल हैं। क्या, शॉर्ट सर्किट के दौरान ही हॉर्स ट्रेडिंग का टर्म आता है? नेता, आग बुझाने के क्रम में हॉर्स ट्रेडिंग करता है? ऐसे कई सवालों के जवाब के पहले मेरे बेटे का यह मासूम सवाल सुनिए। उसने, मुझसे बड़ी मासूमियत से पूछा -पॉलिटिक्स में हॉर्स ट्रेडिंग क्या होता है? मैंने सामान्य भाव में उसे खरीद-फरोख्त की बात समझा दी। उसका दूसरा सवाल था-लेकिन यह हॉर्स ट्रेडिंग क्यों कहलाता है? … नेता, घोड़ा होता है?

भई, नेता क्या होता है और क्या नहीं होता है, इस पर लम्बी बहस हो सकती है। लेकिन यह नेताओं द्वारा ही पब्लिक को दिया गया ज्ञान है कि नेता के घर शॉर्ट सर्किट व हॉर्स ट्रेडिंग, दोनों सिचुएशन लगभग एक ही साथ आता है।

मैं देख रहा हूं-संसदीय राजनीति का यह बहुत पुराना शब्द-टर्म (हॉर्स ट्रेडिंग) आजकल खूब चर्चा में है। खासकर राज्यसभा उपचुनाव के दौरान सभी ने इसका खूब उपयोग किया। जदयू और भाजपा आमने-सामने रही। जदयू ने तो अपने बागी विधायकों के लिए भी इसका इस्तेमाल किया। एक बागी विधायक (अजीत कुमार) का जवाब सुनिए। उन्होंने नीतीश कुमार से पूछा-आपने अनिल शर्मा व साबिर अली को टिकट दिया था। आप बताएं कि आपने इन दोनों से कितने रुपये लिए थे? जदयू, चुप रह गया। मेरी राय में आरोप लगाने के दौरान नेता भूल जाते हैं कि कभी उनको भी इसी स्थिति या इन्हीं आरोपों का सामना करना पड़ सकता है।

भाजपा के वरीय नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि नीतीश कुमार अब जोड़तोड़ बाबू हो गए हैं। राज्यसभा चुनाव में अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए हॉर्स ट्रेडिंग कर रहे हैं और उल्टे भाजपा पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उनके पास ऐसे कई उदाहरण हैं, जिसे वे हार्स ट्रेडिंग कहते हैं। राजद के तेरह विधायकों को अलग गुट के रूप में मान्यता, भाजपा के दो व राजद के तीन विधायकों को विधान पार्षद व मंत्री बनाने से लेकर अब लालू प्रसाद से सहयोग की अपेक्षा तक की बातें। बेशक, यह सब जदयू द्वारा भाजपा पर लगाए गए तल्ख आरोपों का स्वाभाविक जवाब ही है।

मैं समझता हूं इसमें लालू प्रसाद वाले मसले को शामिल नहीं करना चाहिए। दरअसल, संसदीय राजनीति में यह कबूल ली गई सच्चाई है कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है। यह बात पब्लिक भी मान चुकी है। गुजरा लोकसभा चुनाव इसका गवाह है। भाजपा को पानी पी-पीकर कोसने वाले रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा अंतत: भाजपा के साथ हुए और रिकॉर्ड जीत दर्ज की।

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